लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है. राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के कारण आज उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल निर्माण में पूरे देश में पहले स्थान पर बना हुआ है. सरकार ने न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा दिया है, बल्कि किसानों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी लगातार ठोस कदम उठाए हैं.
रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान से किसानों को राहत
योगी सरकार ने गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए त्वरित भुगतान प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है. सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक गन्ना किसानों के बैंक खातों में सीधे 3.25 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया है. चालू पेराई सत्र में भी 94 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा किया जा चुका है. प्रदेश की 99 चीनी मिलों ने किसानों के बकाए का 100 प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित कर दिया है. समय पर और पारदर्शी तरीके से हुए इस भुगतान के कारण गन्ना किसानों की औसत आय में 40,720 रुपये प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है.
उत्पादन और उत्पादकता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
गन्ना विकास विभाग की प्राथमिकताओं के चलते पिछले नौ वर्षों में चीनी मिलों ने 9,220 लाख टन से अधिक गन्ने की पेराई करके लगभग 968.58 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन किया है. वर्ष 2016-17 की तुलना में राज्य का कुल गन्ना उत्पादन 1486.57 लाख टन से बढ़कर 2362 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है. इसी अवधि में औसत गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 82.56 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हो गई है. इसका सीधा अर्थ यह है कि बेहतर तकनीकों और प्रबंधन की बदौलत किसानों को अब प्रति हेक्टेयर 10.18 मीट्रिक टन अतिरिक्त गन्ने की उपज हासिल हो रही है. इसके साथ ही चीनी का कुल उत्पादन और चीनी परता दर भी पहले से काफी बेहतर हुई है.
चीनी मिलों का सुदृढ़ीकरण और नए रोजगार का सृजन
राज्य में गन्ना पेराई की क्षमता को मजबूत बनाने के लिए व्यापक बुनियादी सुधार किए गए हैं. सरकार के प्रयासों से 4 नई आधुनिक चीनी मिलें स्थापित की गईं, जबकि वर्षों से बंद पड़ी 7 चीनी मिलों को फिर से चालू किया गया. इसके अलावा, 44 चीनी मिलों की पेराई क्षमता का विस्तार किया गया, जिससे प्रदेश में 1,28,500 टी.सी.डी. की अतिरिक्त पेराई क्षमता तैयार हुई. छोटे और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए खांडसारी उद्योग में ऑनलाइन लाइसेंसिंग प्रक्रिया लागू की गई. इस आसान व्यवस्था से 285 नई खांडसारी इकाइयां स्थापित हुईं, जिन्होंने 41,900 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा किए.

