पर्यावरण रक्षा को समर्पित उत्तर प्रदेश

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उत्तर प्रदेश का हरित अभियान पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के ऐसे प्रारूप के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो सभी जीव-जंतुओं, वनस्पतियों एवं समस्त प्रजातियों के लिए एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करे।

योगी आदित्यनाथ

पृथ्वी का बढ़ता तापमान, अनियमित मानसून, सूखती नदियां, घटते भूजल स्रोत, वायु प्रदूषण और जैव विविधता का क्षरण मानव जीवन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। विश्व के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, सूखा, हीट वेव जैसी स्थितियां लगातार बन रही हैं। यह स्थिति हमें स्पष्ट संकेत देती है कि प्रकृति के साथ असंतुलित विकास का मूल्य अंततः पूरी मानवता को चुकाना पड़ता है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक नया मार्ग चुना है। देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य के रूप में हमारी जिम्मेदारी केवल आर्थिक विकास को गति देना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करते हुए भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना भी है।

उत्तर प्रदेश का ‘हरित पुनर्जागरण’ देश के सामने सतत विकास के एक प्रभावी माडल के रूप में उभर रहा है। प्रदेश ने यह सिद्ध किया है कि तीव्र आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। इस परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति गांवों, कृषि, जल संसाधनों और स्थानीय समुदायों से जुड़ी पहलों में निहित है। राज्य में बड़े पैमाने पर मिट्टी एवं जल संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन के कार्य किए गए हैं। इससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिला है, प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण हुआ है। उत्तर प्रदेश ने अपनी आर्द्रभूमि और जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी प्रभावी कदम उठाए हैं। बलिया स्थित सुरहाताल पक्षी विहार को देश के 100वें रामसर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त होना गौरव का विषय है। इसके साथ ही राज्य की कुल 13 आर्द्रभूमि अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुकी हैं।

नदी संरक्षण हमारी पर्यावरणीय नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। गंगा, यमुना तथा अन्य नदियों के प्रदूषित भाग की नियमित निगरानी की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण, सीवेज प्रबंधन और जनसहभागिता आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से जल गुणवत्ता में सुधार के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। यह परिवर्तन उन करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा है, जिनकी संस्कृति, आस्था और आजीविका नदियों पर आधारित है। औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करना भी हमारी प्राथमिकताओं में है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है-उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से कोई समझौता न हो।

वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए प्रदेश ने ‘एयरशेड आधारित प्रबंधन’ की अभिनव अवधारणा को अपनाया है। विश्व बैंक समर्थित ‘उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट’ के माध्यम से वायु गुणवत्ता सुधारने पर कार्य किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा, स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहन, पराली एवं कचरा जलाने पर नियंत्रण और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाने जैसे सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए प्रदेश ने दीर्घकालिक जलवायु रणनीतियों पर भी कार्य किया है। ‘कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण’ जैसी अवधारणाओं पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही ‘ग्रीन बजट टैगिंग’ जैसी अभिनव पहल के माध्यम से सरकारी योजनाओं और व्ययों का मूल्यांकन उनके पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

हमारा विश्वास है कि जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की आधारशिला हैं। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश में 2017 से 2026 तक 242 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने पौधारोपण को जनभावनाओं से जुड़ा सामाजिक आंदोलन बना दिया है। हमने जलवायु परिवर्तन की चुनौती को केवल पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि विकास, अर्थव्यवस्था और सामाजिक कल्याण से जुड़े एक व्यापक विषय के रूप में स्वीकार किया है। राज्य में ‘उत्तर प्रदेश राज्य कार्ययोजना जलवायु परिवर्तन 2021-2030’ के अंतर्गत कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा, वन, स्वास्थ्य, शहरी विकास और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य केवल पर्यावरणीय क्षति को कम करना नहीं, बल्कि एक ऐसी विकास व्यवस्था का निर्माण करना है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम, लचीली और समावेशी हो।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए ‘मिशन लाइफ’ ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है। प्रदेश में भी जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, एकल-उपयोग प्लास्टिक में कमी, स्वच्छता तथा जिम्मेदार उपभोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल सरकारी नीतियों में नहीं, बल्कि नागरिकों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव से भी संभव है। साथ ही, सर्कुलर इकोनामी की अवधारणा को बढ़ावा देकर संसाधनों के पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ माडल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह न केवल पर्यावरणीय दबाव को कम करेगा, बल्कि हरित रोजगार, हरित उद्यमिता और नई आर्थिक संभावनाओं का भी सृजन करेगा।

यद्यपि इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी हमारी यात्रा अभी अधूरी है। भूजल संरक्षण, जलवायु-स्मार्ट कृषि, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। ‘विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ की ओर अग्रसर होते हुए हमारा लक्ष्य ऐसे राज्य का निर्माण करना है, जहां आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय स्थिरता साथ-साथ आगे बढ़े। पर्यावरण संरक्षण के व्यापक लक्ष्यों को केवल सरकार के प्रयासों से प्राप्त नहीं किया जा सकता; इसमें समाज, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उत्तर प्रदेश का हरित अभियान पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के ऐसे प्रारूप के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो सभी जीव-जंतुओं, वनस्पतियों एवं समस्त प्रजातियों के लिए एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करे।

(लेखक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

साभारः दैनिक जागरण मूल खबर देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

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