भारत के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है यूपी

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उत्तर प्रदेश दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की प्रगति पर प्रकाश डाला। 2017 के बाद यूपी ‘बीमारू’ से भारत का ‘ग्रोथ इंजन’ बना। कानून-व्यवस्था सुधरी, अर्थव्यवस्था 13 लाख करोड़ से 35 लाख करोड़ हुई। राज्य 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। कृषि, उद्योग, महिला सशक्तिकरण और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे 2047 तक आत्मनिर्भर यूपी का लक्ष्य है।

योगी आदित्यनाथ

आज हम सभी उत्तर प्रदेशवासी पूरे हर्षोउल्लास और गर्व के साथ उत्तर प्रदेश दिवस मना रहे हैं। नौ जलवायु क्षेत्रों से आच्छादित, विविधताओं से समृद्ध और असीम संभावनाओं वाला हमारा प्रदेश भारत की सांस्कृतिक आत्मा का उद्गम, आध्यात्मिक चेतना का केंद्र और आर्थिक सामर्थ्य की आधारशिला रहा है। कृषि, उद्योग और पर्यटन की अपार क्षमताओं के साथ हमारा प्रदेश आज युवा शक्ति, प्रतिभा और उद्यमशीलता का एक जीवंत केंद्र बना है। 2017 उत्तर प्रदेश के इतिहास में परिवर्तन के लिए निर्णायक सिद्ध हुआ।

इससे पहले संगठित अपराध और सत्ता के संरक्षण में पनपे माफिया तंत्र के कारण आम नागरिक और निवेशक, दोनों का विश्वास डगमगा चुका था। ‘बीमारू’ प्रदेश की छवि उत्तर प्रदेश की वास्तविक क्षमता और संभावनाओं पर भारी पड़ रही थी। 2017 में सरकार बनने के बाद हमने ‘जीरो टालरेंस’ की नीति को दृढ़ संकल्प के साथ पूरे प्रदेश में लागू किया। जहां कभी कर्फ्यू-दंगे सामान्य माने जाते थे, वहां आज शांति, स्थिरता और विश्वास का वातावरण है। यही सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण आज उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की सबसे मजबूत नींव बना है।

प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को प्रदेश में पूरी प्रतिबद्धता और निष्ठा के साथ लागू किया गया। डबल इंजन सरकार के सतत् और समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने ‘बाटलनेक से ब्रेकथ्रू’, ‘रेवेन्यू डेफिसिट से रेवेन्यू सरप्लस’ और ‘उपद्रव से उत्सव’ की ऐतिहासिक यात्रा तय की है। आज उत्तर प्रदेश भारत के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है।

अयोध्या की मर्यादा, काशी की शाश्वत चेतना, ब्रजधाम की भक्ति और प्रयागराज की समरसता ने युगों से भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है। प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए गए सतत् प्रयासों ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साथ पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हुए प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रिकार्ड पुलिस भर्तियों, महिला सशक्तीकरण, आधुनिक पुलिसिंग, सुदृढ़ साइबर व फारेंसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा त्वरित आपातकालीन सेवाओं के व्यापक विस्तार ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को नई मजबूती और विश्वसनीयता प्रदान की है।

2017 में जहां उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर था, वहीं आज यह 22 लाख करोड़ रुपये की ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए 35 लाख करोड़ रुपये की ओर तेजी से अग्रसर है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 9.5 प्रतिशत योगदान के साथ उत्तर प्रदेश आज भारत की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रति व्यक्ति आय को लगभग तीन गुना करने में प्रदेश सफल रहा है। हम वर्ष 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश निरंतर एक रेवेन्यू सरप्लस राज्य बना हुआ है।

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि जनता पर बिना कोई अतिरिक्त कर लगाए प्राप्त की गई है, जो यह सिद्ध करता है कि विकास और वित्तीय अनुशासन को एक साथ सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है। देश की कुल कृषि भूमि का लगभग 11 प्रतिशत होने के बावजूद प्रदेश, देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य का रिकार्ड भुगतान, डीबीटी के माध्यम से सीधा और बिचौलिया मुक्त हस्तांतरण तथा बीज से लेकर बाजार तक की सुव्यवस्थित व्यवस्था ने अन्नदाताओं की आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। 2017 के बाद गन्ना किसानों को लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो पूर्ववर्ती दशकों की तुलना में कहीं अधिक है। कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया है।

जिन निवेशकों ने कभी कमजोर कानून-व्यवस्था और नीतिगत पंगुता के कारण प्रदेश से दूरी बना ली थी, आज उनमें उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है। डी-रेगुलेशन के क्षेत्र में प्रदेश ने पूरे देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करते हुए रिकार्ड स्तर पर औद्योगिक निवेश को आकर्षित किया है। 34 से अधिक सेक्टोरल नीतियां और ‘निवेश मित्र’ व ‘निवेश सारथी’ जैसे डिजिटल प्लेटफार्म ने उद्योगों के लिए एक सुगम, पारदर्शी और भरोसेमंद वातावरण तैयार किया है। अब एमओयू केवल कागजों तक सीमित न रहकर ग्राउंड ब्रेकिंग से लेकर उत्पादन और व्यापक रोजगार सृजन तक ठोस परिणाम दे रहे हैं। आज प्रदेश में 27 हजार से अधिक कारखाने संचालित हो रहे हैं।

डबल इंजन सरकार के प्रयासों से एमएसएमई, स्टार्टअप और ओडीओपी को लोकल से ग्लोबल की पहचान मिली है। देश के मोबाइल फोन उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रानिक कंपोनेंट्स का करीब 60 प्रतिशत निर्माण आज उत्तर प्रदेश में हो रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रैपिड रेल और मेट्रो के तीव्र विस्तार ने प्रदेश के व्यापार, पर्यटन और निवेश को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। उत्तर प्रदेश निवेश और नवाचार का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और युवाओं को आधुनिक कौशल से जोड़ते हुए भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है।

सरकारी भर्तियों, स्वरोजगार की योजनाओं और एमएसएमई के माध्यम से करोड़ों लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं। आज प्रदेश में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार हुआ है। मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूह, बीसी सखी और ड्रोन दीदी जैसी पहलों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी वर्ष 2017 के 13 प्रतिशत से बढ़कर आज 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जीरो पावर्टी के लक्ष्य ने छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट है कि हमारी विकास यात्रा तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। 2047 तक एक विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का लक्ष्य हमारे सामने है।

(लेखक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

(यह आलेख दैनिक जागरण वेबसाइट से लिया गया है। जिसका लिंक नीचे हैं।

दृढ़ संकल्प से आधुनिकता की ओर, भारत के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है यूपी

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